भारतीय दंड संहिता की धारा 299 के अनुसार- “आपराधिक मानव वध क्या है ”
आईपीसी की धारा 299 में अपराधिक मानव वध को परिभाषित किया गया है। यदि कोई भी व्यक्ति किसी की मृत्यु कारित करने के इरादे से, या किसी के शरीर को ऐसी चोटें पहुँचाने के इरादे से जिन से मृत्यु कारित होना संभाव्य हो, या यह ज्ञान रखते हुए कि उस के कार्य से मृत्यु कारित होना संभाव्य है उस कार्य को करते हुए मृत्यु कारित कर दे, तो यह कहा गया है कि ऐसा व्यक्ति ‘अपराधिक मानव वध’ का अपराध करता है।
हम इस बात को इस तरह भी समझ सकते हैं कि एक व्यक्ति किसी गड्ढ़े पर लकड़ियाँ और घास इस आशय से बिझाता है कि इस के द्वारा मृत्यु हो सकती है, और संभाव्य है कि इस यत्न से किसी की मृत्यु हो जाए। कोई दूसरा व्यक्ति यह समझते हुए कि वहाँ सख्त जमीन है, उस पर चलता है और गड्डे में गिर कर मारा जाता है तब यह माना जाएगा कि पहले व्यक्ति ने दूसरे का अपराधिक मानव वध किया है।

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